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mahabharat 7.125.61: उस युद्ध में बहुत से क्षत्रियमुख योद्धा द्रोणाचार्य की अस्त्र के समान प्रज्वलित स्पर्श वाली भयंकर एवं कपटी अग्नि में प्रवेश करके जलकर भस्म हो गए ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.125.61 
द्रोणाग्निमस्त्रसंस्पर्शं प्रविष्टा: क्षत्रियर्षभा:।
बहवो दुस्तरं घोरं यत्रादह्यन्त भारत॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में बहुत से क्षत्रियमुख योद्धा द्रोणाचार्य की अस्त्र के समान प्रज्वलित स्पर्श वाली भयंकर एवं कपटी अग्नि में प्रवेश करके जलकर भस्म हो गए ॥61॥
 
India In that war, many Kshatriya-headed warriors were burnt to ashes after entering the fierce and insidious fire of Dronacharya, who had the burning touch of a weapon. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)