Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.125.6: जैसे विशाल मेघ गन्धमादन पर्वत पर वर्षा करते हैं, उसी प्रकार उसने तीखे बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.125.6 
विमुञ्चन् विशिखांस्तीक्ष्णानाचार्यं भृशमार्दयत्।
महामेघो यथा वर्षं विमुञ्चन् गन्धमादने॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जैसे विशाल मेघ गन्धमादन पर्वत पर वर्षा करते हैं, उसी प्रकार उसने तीखे बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई।
 
He tormented Drona immensely by showering sharp arrows like the great clouds pouring rain on the Gandhamadana mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)