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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  7.125.59 
ब्राह्मणेन तपो नूनं चरितं दुश्चरं महत्।
तथा हि युधि संक्रुद्धो दहति क्षत्रियर्षभान्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
और वे आपस में कहने लगे, 'इस ब्राह्मण ने अवश्य ही कोई बहुत कठिन तपस्या की है, इसीलिए यह युद्ध में अत्यन्त क्रोधित होकर श्रेष्ठ क्षत्रियों को जला रहा है।
 
And they began to say to each other, 'This Brahmin has certainly performed some very difficult penance, that is why he is burning the best Kshatriyas in the war in a very angry mood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)