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mahabharat 7.125.58: माननीय भरतनन्दन! द्रोण का पराक्रम देखकर वे भीमसेन और धृष्टद्युम्न को बुलाने लगे॥58॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.125.58 
प्राक्रोशन् भीमसेनं ते धृष्टद्युम्नं च भारत।
दृष्ट्वा द्रोणस्य कर्माणि तथारूपाणि मारिष॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
माननीय भरतनन्दन! द्रोण का पराक्रम देखकर वे भीमसेन और धृष्टद्युम्न को बुलाने लगे॥58॥
 
Honorable Bharatnandan! Seeing the bravery of Drona, they started calling Bhimsen and Dhrishtadyumna. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)