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mahabharat 7.125.51: हे भरतनन्दन! उस समय ऊपर से सूर्य तप रहा था और युद्धभूमि में द्रोणाचार्य के धनुर्धर आक्रमण कर रहे थे। उस स्थिति में पांचाल योद्धा अत्यन्त भयभीत और हृदय में व्याकुल हो गए॥51॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.125.51 
प्रताप्यमाना: सूर्येण हन्यमानाश्च सायकै:।
अन्वपद्यन्त पञ्चालास्तदा संत्रस्तचेतस:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! उस समय ऊपर से सूर्य तप रहा था और युद्धभूमि में द्रोणाचार्य के धनुर्धर आक्रमण कर रहे थे। उस स्थिति में पांचाल योद्धा अत्यन्त भयभीत और हृदय में व्याकुल हो गए॥51॥
 
O Bharatanandan! At that time the sun was scorching from above and on the battlefield, Dronacharya's archers were attacking. In that situation the Panchal warriors became very frightened and restless in their hearts. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)