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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.125.50 
ततो निष्ठानको घोर: पाण्डवानामजायत।
द्रोणेन वध्यमानेषु सैन्येषु भरतर्षभ॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तब द्रोणाचार्य के द्वारा मारे जाने पर पाण्डव सेनाएँ पीड़ा से चिल्लाने लगीं।
 
O best of the Bharatas! Then the Pandava armies began to cry in pain as they were being killed by Dronacharya. 50
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)