Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.125.5: हे मनुष्यों! उस समय अपने पाँचों भाइयों में सबसे बड़े, महाबली केकय नामक योद्धा बृहत्क्षत्र द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए आगे बढ़े॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.125.5 
तमभ्ययाद् बृहत्क्षत्र: केकयानां महारथ:।
भ्रातॄणां नृप पञ्चानां श्रेष्ठ: समरकर्कश:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! उस समय अपने पाँचों भाइयों में सबसे बड़े, महाबली केकय नामक योद्धा बृहत्क्षत्र द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए आगे बढ़े॥5॥
 
Lord of men! At that time the fierce warrior Kekaya Brihatkshatra, who was the eldest among his five brothers, stepped forward to face Dronacharya. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)