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mahabharat 7.125.49: जैसे गौएँ शीत से काँप उठती हैं और बड़े-बड़े राक्षस इन्द्र के प्रहार से काँप उठते हैं, उसी प्रकार द्रोणाचार्य के बाणों से काँपने वाले पाँचाल सैनिक भी काँप उठे।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.125.49 
ते वध्यमाना द्रोणेन शक्रेणेव महासुरा:।
समकम्पन्त पञ्चाला गाव: शीतार्दिता इव॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जैसे गौएँ शीत से काँप उठती हैं और बड़े-बड़े राक्षस इन्द्र के प्रहार से काँप उठते हैं, उसी प्रकार द्रोणाचार्य के बाणों से काँपने वाले पाँचाल सैनिक भी काँप उठे।
 
Just as cows tremble due to cold and great demons tremble after being struck by Lord Indra, similarly the Panchala soldiers trembled after being struck by Dronacharya's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)