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mahabharat 7.125.36: द्रोणाचार्य ने पाँच बाणों से तोमर को चकनाचूर कर दिया और पाँच बाणों से धृष्टकेतु का बल भी चूर कर दिया। वे दोनों अस्त्र पृथ्वी पर गिर पड़े, मानो गरुड़ द्वारा चूर किए गए दो सर्प।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.125.36 
तोमरं पञ्चभिर्भित्त्वा शक्तिं चिच्छेद पञ्चभि:।
तौ जग्मतुर्महीं छिन्नौ सर्पाविव गरुत्मता॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य ने पाँच बाणों से तोमर को चकनाचूर कर दिया और पाँच बाणों से धृष्टकेतु का बल भी चूर कर दिया। वे दोनों अस्त्र पृथ्वी पर गिर पड़े, मानो गरुड़ द्वारा चूर किए गए दो सर्प।
 
Dronacharya shattered Tomara with five arrows and also shattered Dhrishtaketu's strength with five arrows. Both those weapons fell to the earth like two snakes shattered by Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)