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mahabharat 7.125.35: अपनी गदा नष्ट हुई देखकर वीर धृष्टकेतु ने क्रोध में भरकर अपनी गदा तथा स्वर्ण-मंडित तेजोमय तलवार से द्रोणाचार्य पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.125.35 
गदां विनिहतां दृष्ट्वा धृष्टकेतुरमर्षण:।
तोमरं व्यसृजद् वीर: शक्तिं च कनकोज्ज्वलाम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अपनी गदा नष्ट हुई देखकर वीर धृष्टकेतु ने क्रोध में भरकर अपनी गदा तथा स्वर्ण-मंडित तेजोमय तलवार से द्रोणाचार्य पर आक्रमण किया।
 
Seeing his mace destroyed, the valiant Dhrishtaketu, filled with anger, attacked Dronacharya with his mace and the golden-adorned radiant sword.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)