Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.125.31-32h: तत्पश्चात् उन्होंने धृष्टकेतु को पच्चीस बाण मारे। उस समय धृष्टकेतु ने शीघ्रतापूर्वक रथ से कूदकर हाथ में गदा ली और क्रोध में भरे हुए सर्प के समान द्रोणाचार्य पर फेंकी। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.125.31-32h 
अथैनं पञ्चविंशत्या सायकानां समार्पयत्।
अवप्लुत्य रथाच्चैद्यो गदामादाय सत्वर:॥ ३१॥
भारद्वाजाय चिक्षेप रुषितामिव पन्नगीम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने धृष्टकेतु को पच्चीस बाण मारे। उस समय धृष्टकेतु ने शीघ्रतापूर्वक रथ से कूदकर हाथ में गदा ली और क्रोध में भरे हुए सर्प के समान द्रोणाचार्य पर फेंकी। 31 1/2॥
 
After that he shot Dhrishtaketu with twenty-five arrows. At that time, Dhrishketu quickly jumped from the chariot and took the mace in his hand and, like a snake filled with rage, threw it at Dronacharya. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)