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mahabharat 7.125.28: तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने गिद्ध के पंख वाले तीखे भाले से विजय हेतु प्रयत्नशील शक्तिशाली धृष्टकेतु के धनुष को दो टुकड़ों में काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.125.28 
तस्य द्रोणो धनुर्मध्ये क्षुरप्रेण शितेन च।
चकर्त गार्ध्रपत्रेण यतमानस्य शुष्मिण:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने गिद्ध के पंख वाले तीखे भाले से विजय हेतु प्रयत्नशील शक्तिशाली धृष्टकेतु के धनुष को दो टुकड़ों में काट डाला।
 
Then with the sharp lance having the feather of a vulture, Dronacharya cut the bow of the powerful Dhrishtaketu, who was striving for victory, in two.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)