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mahabharat 7.125.27: उस समय उसने द्रोणाचार्य को उनके घोड़े, रथ और ध्वज सहित साठ बाणों से घायल कर दिया। फिर, मानो किसी सोते हुए सिंह को पीड़ा दे रहा हो, उसने अन्य तीखे बाणों से भी आचार्य को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.125.27 
सोऽविध्यत तदा द्रोणं षष्टॺा साश्वरथध्वजम्।
पुनश्चान्यै: शरैस्तीक्ष्णै: सुप्तं व्याघ्रं तुदन्निव॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसने द्रोणाचार्य को उनके घोड़े, रथ और ध्वज सहित साठ बाणों से घायल कर दिया। फिर, मानो किसी सोते हुए सिंह को पीड़ा दे रहा हो, उसने अन्य तीखे बाणों से भी आचार्य को घायल कर दिया।
 
At that time he pierced Dronacharya along with his horse, chariot and flag with sixty arrows. Then, as if tormenting a sleeping lion, he wounded the Acharya with other sharp arrows as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)