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mahabharat 7.125.24: सारथी! चलो, हम उस स्थान पर चलें जहाँ द्रोणाचार्य कवच धारण करके खड़े हैं और समस्त केकय और पांचाल सेना का संहार कर रहे हैं॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.125.24 
सारथे याहि यत्रैष द्रोणस्तिष्ठति दंशित:।
विनिघ्नन् केकयान् सर्वान् पञ्चालानां च वाहिनीम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
सारथी! चलो, हम उस स्थान पर चलें जहाँ द्रोणाचार्य कवच धारण करके खड़े हैं और समस्त केकय और पांचाल सेना का संहार कर रहे हैं॥ 24॥
 
Charioteer! Let us go to the place where Dronacharya is standing, wearing his armour, and killing all the Kekayas and the Panchala army.'॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)