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mahabharat 7.125.2: वीर द्रोणाचार्य ने लाल घोड़ों से जुते हुए रथ पर आरूढ़ होकर, एकाग्रचित्त होकर, मध्यम गति से युद्धभूमि में पाण्डवों पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.125.2 
शोणाश्वं रथमास्थाय नरवीर: समाहित:।
समरेऽभ्यद्रवत् पाण्डून् जवमास्थाय मध्यमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वीर द्रोणाचार्य ने लाल घोड़ों से जुते हुए रथ पर आरूढ़ होकर, एकाग्रचित्त होकर, मध्यम गति से युद्धभूमि में पाण्डवों पर आक्रमण किया।
 
Mounting his chariot drawn by red horses, the valiant Drona, with his mind focused, attacked the Pandavas on the battlefield using moderate speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)