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mahabharat 7.125.17: महाराज! द्रोणाचार्य के बाणों से अत्यन्त घायल होकर केकय राजकुमार अत्यन्त क्रोधित हो गया और अपनी दोनों सुन्दर आँखें खोलकर देखने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.125.17 
सोऽतिविद्धो महाराज कैकेयो द्रोणसायकै:।
क्रोधेन महताऽऽविष्टो व्यावृत्य नयने शुभे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणाचार्य के बाणों से अत्यन्त घायल होकर केकय राजकुमार अत्यन्त क्रोधित हो गया और अपनी दोनों सुन्दर आँखें खोलकर देखने लगा।
 
Maharaj! The Kekaya prince became very angry after being severely injured by Dronacharya's arrows. He started looking with his two beautiful eyes wide open. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)