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mahabharat 7.125.14: भरतनंदन! ब्रह्मास्त्र के नष्ट हो जाने पर बृहत्क्षत्र ने तीक्ष्ण घोड़े पर सवार होकर स्वर्ण पंखयुक्त साठ बाणों द्वारा ब्राह्मण द्रोणाचार्य को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 125: द्रोणाचार्यके द्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु, जरासन्धपुत्र सहदेव तथा धृष्टद्युम्नकुमार क्षत्रधर्माका वध और चेकितानकी पराजय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.125.14 
ततोऽस्त्रे निहते ब्राह्मे बृहत्क्षत्रस्तु भारत।
विव्याध ब्राह्मणं षष्टॺा स्वर्णपुङ्खै:शिलाशितै:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! ब्रह्मास्त्र के नष्ट हो जाने पर बृहत्क्षत्र ने तीक्ष्ण घोड़े पर सवार होकर स्वर्ण पंखयुक्त साठ बाणों द्वारा ब्राह्मण द्रोणाचार्य को घायल कर दिया।
 
Bharatnandan! After Brahmastra was dispelled, Brihatkshatra pierced the Brahmin Dronacharya with sixty arrows equipped with golden feathers mounted on a sharpened horse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)