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mahabharat 7.124.47: हे पृथ्वी के स्वामी! उस महायुद्ध में युद्ध-दल के द्वार पर शत्रुओं से युद्ध करते हुए द्रोणाचार्य की गर्जना भी सुनाई दी। इस प्रकार अर्जुन, द्रोणाचार्य और महारथी सात्यकि के क्रोधित होने पर युद्धभूमि में यह भयंकर प्रलय हो गया।॥47॥   |   mahabharat अध्याय 7.124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.124.47 
द्रोणस्यापि परै: सार्धं व्यूहद्वारे महारणे।
एवमेष क्षयो वृत्त: पृथिव्यां पृथिवीपते।
क्रुद्धेऽर्जुने तथा द्रोणे सात्वते च महारथे॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! उस महायुद्ध में युद्ध-दल के द्वार पर शत्रुओं से युद्ध करते हुए द्रोणाचार्य की गर्जना भी सुनाई दी। इस प्रकार अर्जुन, द्रोणाचार्य और महारथी सात्यकि के क्रोधित होने पर युद्धभूमि में यह भयंकर प्रलय हो गया।॥47॥
 
O lord of the earth! In that great war, the roar of Dronacharya was also heard while he was fighting with the enemies at the gate of the battle formation. In this way, when Arjuna, Dronacharya and the great warrior Satyaki became angry, this terrible devastation took place on the battlefield. ॥ 47॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे संकुलयुद्धे चतुर्विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिका प्रवेश और दोनों सेनाओंका घमासान युद्धविषयक एक सौ चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२४॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ४९ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)