श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.124.4 
यत् कृतं वृष्णिवीरेण कर्म शंससि मे रणे।
नैतदुत्सहते कर्तुं कर्म शक्रोऽपि संजय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय! तुम युद्धस्थल में वृष्णिवंशी वीर सात्यकि के विषय में जो कार्य कह रहे हो, वह देवताओं के राजा इन्द्र भी नहीं कर सकते।॥4॥
 
Sanjaya! The deed which you are praising about the heroic Satyaki of the Vrishni clan, on the battlefield, cannot be performed even by the king of gods, Indra. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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