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mahabharat 7.124.35-36h: दुर्योधन ने अपना धनुष खींचकर उसे गोलाकार बना लिया था। अपनी विद्या और अस्त्र-शक्ति से वह धनुष पर बाण चढ़ाता, उन्हें चलाता और इतनी तेजी से अपने शत्रुओं का संहार करता कि कोई उसे ऐसा करते हुए देख भी नहीं सकता था।   |   mahabharat अध्याय 7.124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.124.35-36h 
न संदधन् विमुञ्चन् वा मण्डलीकृतकार्मुक:॥ ३५॥
अदृश्यत रिपून् निघ्नन् शिक्षयास्त्रबलेन च।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने अपना धनुष खींचकर उसे गोलाकार बना लिया था। अपनी विद्या और अस्त्र-शक्ति से वह धनुष पर बाण चढ़ाता, उन्हें चलाता और इतनी तेजी से अपने शत्रुओं का संहार करता कि कोई उसे ऐसा करते हुए देख भी नहीं सकता था।
 
Duryodhan had drawn his bow and made it circular. With his learning and the power of weapons, he would place the arrows on the bow, shoot them and kill his enemies so quickly that no one could see him doing this. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)