श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.124.30-31h 
दुर्योधनेन समरे पृतना पाण्डवी रणे॥ ३०॥
नलिनी द्विरदेनेव समन्तात् प्रतिलोडिता।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने युद्धभूमि में पाण्डव सेना को सब ओर से उसी प्रकार मथ डाला, जैसे हाथी कमलों से भरे हुए तालाब को मथ डालता है।
 
Duryodhana churned the Pandava army from all sides in the battleground, like an elephant churns a pond full of lotuses. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)