श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.124.3 
अथवा शून्यमासीत् तद् येन यात: स सात्यकि:।
हतभूयिष्ठमथवा येन यात: स सात्यकि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
क्या जिस मार्ग पर सात्यकि आगे बढ़े थे, वह वीरों से रहित हो गया था अथवा वहाँ के अधिकांश सैनिक मारे जा चुके थे ? ॥3॥
 
Or, had the road along which Satyaki had advanced become devoid of brave men or had most of the soldiers there been killed? ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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