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श्लोक 7.124.3  |
अथवा शून्यमासीत् तद् येन यात: स सात्यकि:।
हतभूयिष्ठमथवा येन यात: स सात्यकि:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| क्या जिस मार्ग पर सात्यकि आगे बढ़े थे, वह वीरों से रहित हो गया था अथवा वहाँ के अधिकांश सैनिक मारे जा चुके थे ? ॥3॥ |
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| Or, had the road along which Satyaki had advanced become devoid of brave men or had most of the soldiers there been killed? ॥ 3॥ |
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