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mahabharat 7.124.28-29h: अत्यंत सुख-सुविधाओं में पला-बढ़ा, इस जगत का एकछत्र स्वामी और धन की देवी दुर्योधन क्या बहुत से योद्धाओं से युद्ध करने के बाद युद्धभूमि से पीछे हट गया था?   |   mahabharat अध्याय 7.124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.124.28-29h 
सोऽत्यन्तसुखसंवृद्धो लक्ष्म्या लोकस्य चेश्वर:॥ २८॥
एको बहून् समासाद्य कच्चिन्नासीत् पराङ्मुख:।
 
 
अनुवाद
अत्यंत सुख-सुविधाओं में पला-बढ़ा, इस जगत का एकछत्र स्वामी और धन की देवी दुर्योधन क्या बहुत से योद्धाओं से युद्ध करने के बाद युद्धभूमि से पीछे हट गया था?
 
Brought up in utmost comfort, did Duryodhana, the lone lord of this world and the goddess of wealth, turn away from the battlefield after fighting with a large number of warriors?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)