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mahabharat 7.124.20-21h: वह महान प्रतापी राजा स्वर्ग प्राप्ति का इच्छुक था। इसलिए वह युद्ध में शस्त्रों से मरना चाहता था। इसीलिए उसने अपने मित्र का कार्य सिद्ध करने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की।   |   mahabharat अध्याय 7.124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.124.20-21h 
इच्छन्तो निधनं युद्धे शस्त्रैरुत्तमतेजस:॥ २०॥
स्वर्गेप्सवो मित्रकार्ये नाभ्यनन्दन्त जीवितम्।
 
 
अनुवाद
वह महान प्रतापी राजा स्वर्ग प्राप्ति का इच्छुक था। इसलिए वह युद्ध में शस्त्रों से मरना चाहता था। इसीलिए उसने अपने मित्र का कार्य सिद्ध करने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की।
 
That great king of great glory wanted to attain heaven. Therefore, he desired to die by weapons in the war. That is why he did not care for his life in an attempt to accomplish the work of his friend. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)