श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.124.14 
संरब्धानां प्रवीराणां समरे दृढकर्मणाम्।
तत्रासीत् सुमहाशब्दस्तुमुलो लोमहर्षण:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वे सभी श्रेष्ठ योद्धा क्रोध में भरकर युद्धभूमि में अपना पराक्रम दिखाने को तत्पर थे। उनका महान् कोलाहल इतना भयंकर था कि रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ जाती थी॥14॥
 
All those prominent warriors were filled with anger and were about to display their might on the battlefield. Their great and tumultuous uproar was enough to send chills down the spine.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)