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mahabharat 7.124.11: प्रजानाथ! जयद्रथ के वध के समय द्रोणाचार्य ने जैसी सेना बनाई थी, वैसी दूसरी कोई सेना नहीं बन सकती ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.124: कौरव-पाण्डव-सेनाका घोर युद्ध तथा पाण्डवोंके साथ दुर्योधनका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.124.11 
न च वै तादृशो व्यूह आसीत् कश्चिद् विशाम्पते।
यादृग् जयद्रथवधे द्रोणेन विहितोऽभवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! जयद्रथ के वध के समय द्रोणाचार्य ने जैसी सेना बनाई थी, वैसी दूसरी कोई सेना नहीं बन सकती ॥11॥
 
Prajanath! No other formation could be formed like the one formed by Dronacharya at the time of killing Jayadratha. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)