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mahabharat 7.123.8: उन्होंने चार बाणों से अपने घोड़ों को, तीन बाणों से अपने सारथि को तथा स्वयं सात्यकि को सौ बाणों से युद्धभूमि में घायल कर दिया और जोर से गर्जना की।   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.123.8 
चतुर्भिर्वाजिनस्तस्य सारथिं च त्रिभि: शरै:।
सात्यकिं च शतेनाजौ विद्‍ध्वा नादं मुमोच स:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने चार बाणों से अपने घोड़ों को, तीन बाणों से अपने सारथि को तथा स्वयं सात्यकि को सौ बाणों से युद्धभूमि में घायल कर दिया और जोर से गर्जना की।
 
He wounded his horses with four arrows, his charioteer with three arrows and Satyaki himself with a hundred arrows on the battlefield and roared loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)