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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.123.4 
सर्वतो भरतश्रेष्ठ विसृजन् सायकान् बहून्।
पर्जन्य इव घोषेण नादयन् वै दिशो दश॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उन्होंने सब ओर से बहुत से बाणों की वर्षा की और मेघ के समान गम्भीर गर्जना से सम्पूर्ण दिशाएँ गूँज उठीं।
 
O best of the Bharatas! He rained down many arrows from all sides, resounding all directions with his deep roar like that of a cloud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)