राजन! प्रभु! इस प्रकार युद्ध में दु:शासन पर विजय पाकर सात्यकि तुरन्त उसी मार्ग पर चल पड़े, जिस मार्ग से अर्जुन गए थे॥37॥
Rajan! Lord! Thus, after getting victory over Dushasana in the battle, Satyaki immediately set out on the same path by which Arjuna had gone. 37॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे दु:शासनपराजये त्रयोविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिका प्रवेश और दु:शासनकी पराजयविषयक एक सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)