श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.123.35 
तमभिद्रुत्य शैनेयो मुहूर्तमिव भारत।
न जघान महाबाहुर्भीमसेनवच: स्मरन्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाबाहु सात्यकि ने लगभग दो घंटे तक दु:शासन का पीछा किया; किन्तु भीमसेन के वचनों को स्मरण करके उन्होंने उसे नहीं मारा।
 
At that time the mighty-armed Satyaki chased Dushasan for about two hours; but remembering Bhimasena's words he did not kill him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)