श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  7.123.32-33 
धनुरेकेन भल्लेन हस्तावापं च पञ्चभि:॥ ३२॥
ध्वजं च रथशक्तिं च भल्लाभ्यां परमास्त्रवित्।
चिच्छेद विशिखैस्तीक्ष्णैस्तथोभौ पार्ष्णिसारथी॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महापंडित सात्यकि ने एक फरसे से दु:शासन का धनुष, पाँच फरसे से उसके दस्ताने तथा दो फरसे से उसकी ध्वजा और रथशक्ति को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। इतना ही नहीं, तीखे बाणों से उसके दोनों पार्श्वरक्षकों को भी मार डाला। 32-33॥
 
Thereafter, the great astrologer Satyaki broke Dushasan's bow into pieces with one flail, his gloves with five flails and his flag and chariot power with two flails. Not only this, they also killed both his side guards with sharp arrows. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)