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mahabharat 7.123.29-30h: तब उसने लोहे के बने आठ तीखे बाणों से उसे पुनः घायल कर दिया। फिर दु:शासन ने भी बीस बाण मारकर सात्यकि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.123.29-30h 
सर्वायसैस्तीक्ष्णवक्त्रै: पुनर्विव्याध चाष्टभि:॥ २९॥
दु:शासनस्तु विंशत्या सात्यकिं प्रत्यविध्यत।
 
 
अनुवाद
तब उसने लोहे के बने आठ तीखे बाणों से उसे पुनः घायल कर दिया। फिर दु:शासन ने भी बीस बाण मारकर सात्यकि को घायल कर दिया।
 
Then he again wounded him with eight sharp arrows made of iron. Then Dushasan also wounded Satyaki by shooting twenty arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)