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mahabharat 7.123.25-26h: तदनन्तर वहाँ से जाते हुए दु:शासन ने वृष्णि वीर सत्यकिप्पुर पर क्रोध किया और उसे मार डालने की इच्छा से उसने अपनी लोहे की बनी हुई सारी शक्ति का प्रयोग किया। 25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.123.25-26h 
ततो दु:शासन: क्रुद्धो वृष्णिवीराय गच्छते॥ २५॥
सर्वपारशवीं शक्तिं विससर्ज जिघांसया।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वहाँ से जाते हुए दु:शासन ने वृष्णि वीर सत्यकिप्पुर पर क्रोध किया और उसे मार डालने की इच्छा से उसने अपनी लोहे की बनी हुई सारी शक्ति का प्रयोग किया। 25 1/2॥
 
Thereafter, Dushasan, while leaving from there, got angry at Vrishni Veer Satya Kippur and with the desire to kill him, he used all his power made of iron. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)