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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय
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श्लोक 1
श्लोक
7.123.1
संजय उवाच
ततो दु:शासनो राजन् शैनेयं समुपाद्रवत्।
किरन् शतसहस्राणि पर्जन्य इव वृष्टिमान्॥ १॥
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! तत्पश्चात् दु:शासन ने वर्षा करने वाले मेघ के समान लाखों बाण बिखेरकर शिनि के पौत्र सात्यकि पर आक्रमण किया।
Sanjaya says: O King! Thereafter Dushasan attacked Satyaki, the grandson of Shini, scattering millions of arrows like a rain-bearing cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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