श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.122.9 
क्व ते मानश्च दर्पश्च क्व ते वीर्यं क्व गर्जितम्।
आशीविषसमान् पार्थान् कोपयित्वा क्व यास्यसि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तेरा अभिमान और अहंकार कहाँ गया? तेरा पराक्रम कहाँ गया? और तेरी गर्जना कहाँ गई? तू विषैले सर्पों के समान कुन्तीपुत्रों को क्रोधित करके कहाँ भाग रहा है?॥9॥
 
Where has your pride and arrogance gone? Where is your valour? And where has your roar gone? Where are you running away after enraging the sons of Kunti like poisonous serpents?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)