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mahabharat 7.122.8: पूर्वकाल में विशेषतः पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के प्रति कहे गए अप्रिय वचन तथा देवी द्रौपदी को जो कष्ट पहुँचाए गए थे, इन सबका मूल कारण आप ही थे॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.122.8 
अप्रियाणां हि वचसां पाण्डवस्य विशेषत:।
द्रौपद्याश्च परिक्लेशस्त्वन्मूलो ह्यभवत् पुरा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में विशेषतः पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के प्रति कहे गए अप्रिय वचन तथा देवी द्रौपदी को जो कष्ट पहुँचाए गए थे, इन सबका मूल कारण आप ही थे॥8॥
 
In the past, especially the unpleasant words spoken to Yudhishthira, the son of Pandu, and the suffering inflicted on Goddess Draupadi, you were the root cause of all these. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)