श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  7.122.70-71h 
द्रोणस्तु त्वरितो युद्धे धृष्टद्युम्नस्य सारथे:॥ ७०॥
शिर: प्रच्यावयामास फलं पक्वं तरोरिव।
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोणाचार्य ने बड़ी उतावली से धृष्टद्युम्न के सारथि का सिर वृक्ष से पके फल के समान धड़ से अलग कर दिया।
 
At this time, Drona, in his great haste, struck off Dhrishtadyumna's charioteer's head from his body like a ripe fruit from a tree. 70 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)