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mahabharat 7.122.68: वे दोनों महामनस्वी योद्धा अपने बाणों से आकाश, दिशाओं और पृथ्वी को ढकने लगे। समस्त प्राणी उनके उस अद्भुत युद्ध की प्रशंसा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  7.122.68 
छादयन्तौ महात्मानौ शरैर्व्योम दिशो महीम्।
तदद्भुतं तयोर्युद्धं भूतसङ्घा ह्यपूजयन्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों महामनस्वी योद्धा अपने बाणों से आकाश, दिशाओं और पृथ्वी को ढकने लगे। समस्त प्राणी उनके उस अद्भुत युद्ध की प्रशंसा करने लगे।
 
Those two great-minded warriors started covering the sky, directions and earth with their arrows. All the creatures praised that wonderful fight between them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)