श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.122.67 
मोहयन्तौ मनांस्याजौ योधानां द्रोणपार्षतौ।
सृजन्तौ शरवर्षाणि वर्षास्विव बलाहकौ॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
67. वर्षा ऋतु में दो मेघों के समान बाणों की वर्षा करते हुए द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्न ने युद्धस्थल में उपस्थित समस्त योद्धाओं के मन को मोहित कर लिया।
 
Showering arrows like two clouds during the rainy season, Dronacharya and Dhrishtadyumna captivated the minds of all the warriors on the battlefield. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)