Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.122.6: स्वयं पांचालों और पाण्डवों के साथ महान् शत्रुता रखते हुए, युद्धभूमि में अकेले सात्यकि का सामना करते हुए आप इतने भयभीत क्यों हो गए हैं?॥6॥ | mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वयं वैरं महत् कृत्वा पञ्चालै: पाण्डवै: सह।
एकं सात्यकिमासाद्य कथं भीतोऽसि संयुगे॥ ६॥
अनुवाद
स्वयं पांचालों और पाण्डवों के साथ महान् शत्रुता रखते हुए, युद्धभूमि में अकेले सात्यकि का सामना करते हुए आप इतने भयभीत क्यों हो गए हैं?॥6॥
Having taken up a great enmity with the Panchalas and the Pandavas yourself, how come you have become so frightened, facing Satyaki alone on the battlefield?॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥