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mahabharat 7.122.58: हे महाराज! महारथी धृष्टद्युम्न शीघ्रतापूर्वक अपने रथ से उतरकर द्रोणाचार्य के रथ पर चढ़ गये।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.122.58 
अवप्लुत्य रथाच्चापि त्वरित: स महारथ:।
आरुरोह रथं तूर्णं भारद्वाजस्य मारिष॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! महारथी धृष्टद्युम्न शीघ्रतापूर्वक अपने रथ से उतरकर द्रोणाचार्य के रथ पर चढ़ गये।
 
Honorable King! The great warrior Dhrishtadyumna quickly jumped from his chariot and boarded Dronacharya's chariot. 58
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)