vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय
»
श्लोक 57
श्लोक
7.122.57
तं वै तथागतं दृष्ट्वा धृष्टद्युम्न: पराक्रमी।
चापमुत्सृज्य शीघ्रं तु असिं जग्राह वीर्यवान्॥ ५७॥
अनुवाद
उसे उस अवस्था में देखकर बल और पराक्रम से संपन्न धृष्टद्युम्न ने अपना धनुष नीचे रख दिया और तुरन्त तलवार उठा ली।
Seeing him in that condition, Dhrishtadyumna, endowed with strength and valour, put down his bow and immediately took up his sword.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×