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mahabharat 7.122.50-d1: महाराज! युद्धस्थल में उन राजकुमारों को मारकर महाबली द्रोणाचार्य ने सुवर्णमय पृष्ठ वाला दुर्जय धनुष उठाया। महाराज! उस समय वह धनुष बादलों में बिजली के समान चमक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 50-d1
 
 
श्लोक  7.122.50-d1 
तान् निहत्य रणे राजन् भारद्वाज: प्रतापवान्॥ ५०॥
कार्मुकं भ्रामयामास हेमपृष्ठं दुरासदम्।
(तदस्य भ्राजते राजन् मेघमध्ये तडिद् यथा॥)
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्धस्थल में उन राजकुमारों को मारकर महाबली द्रोणाचार्य ने सुवर्णमय पृष्ठ वाला दुर्जय धनुष उठाया। महाराज! उस समय वह धनुष बादलों में बिजली के समान चमक रहा था।
 
Maharaj! After killing those princes on the battlefield, the mighty Drona started swinging the Durjaya bow which had a golden back. King! At that time that bow was shining like lightning in the clouds. 50 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)