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mahabharat 7.122.48-49h: तत्पश्चात् महाप्रतापी द्रोणाचार्य ने अन्य तीक्ष्ण बाणों से उन राजकुमारों के सिर काट डाले, मानो वृक्षों से फूल तोड़ रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.122.48-49h 
अथापरै: सुनिशितैर्भल्लैस्तेषां महायशा:॥ ४८॥
पुष्पाणीव विचिन्वन् हि सोत्तमाङ्गान्यपातयत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाप्रतापी द्रोणाचार्य ने अन्य तीक्ष्ण बाणों से उन राजकुमारों के सिर काट डाले, मानो वृक्षों से फूल तोड़ रहे हों।
 
Thereafter, with other sharp arrows, the illustrious Drona cut off the heads of those princes as if he had plucked flowers from the trees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)