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mahabharat 7.122.45: उन महाबली राजकुमारों द्वारा बार-बार घायल होकर, दोनों में श्रेष्ठ द्रोण ने उनके विनाश के लिए बड़ा क्रोध प्रकट किया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.122.45 
स वध्यमानो बहुधा राजपुत्रैर्महारथै:।
क्रोधमाहारयत् तेषामभावाय द्विजर्षभ:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उन महाबली राजकुमारों द्वारा बार-बार घायल होकर, दोनों में श्रेष्ठ द्रोण ने उनके विनाश के लिए बड़ा क्रोध प्रकट किया ॥45॥
 
Being repeatedly injured by those mighty princes, Drona, the best of the two, expressed great anger for their destruction. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)