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mahabharat 7.122.40: राजन! वह प्रज्वलित बाण पांचाल पुत्र वीरकेतु को छेदकर रक्त से लथपथ हो गया और तुरन्त ही भूमि में धंस गया।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.122.40 
स भित्त्वा तु शरो राजन् पाञ्चालकुलनन्दनम्।
अभ्यगाद् धरणीं तूर्णं लोहितार्द्रो ज्वलन्निव॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह प्रज्वलित बाण पांचाल पुत्र वीरकेतु को छेदकर रक्त से लथपथ हो गया और तुरन्त ही भूमि में धंस गया।
 
King! That blazing arrow pierced Veerketu, son of the Panchala clan, and became soaked in blood and immediately sank into the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)