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mahabharat 7.122.39: तत्पश्चात् शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले आचार्य ने अपने धनुष पर सूर्य और अग्नि के समान भयंकर बाण चढ़ाकर वीरकेतु के रथ पर चलाया ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.122.39 
तत: शरं महाघोरं सूर्यपावकसंनिभम्।
संदधे परवीरघ्नो वीरकेतो रथं प्रति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले आचार्य ने अपने धनुष पर सूर्य और अग्नि के समान भयंकर बाण चढ़ाकर वीरकेतु के रथ पर चलाया ॥39॥
 
After that, the Acharya who killed the enemy warriors placed an arrow as fierce as the sun and fire on his bow and shot it at the chariot of Veerketu. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)