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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय
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श्लोक 37
श्लोक
7.122.37
ते शरैरग्निसंकाशैस्तोमरैश्च महाधनै:।
शस्त्रैश्च विविधै राजन् द्रोणमेकमवाकिरन्॥ ३७॥
अनुवाद
हे राजन! उसने अग्नि के समान तेजस्वी बाण, बहुमूल्य गदाएँ और नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करके केवल द्रोणाचार्य को ही आच्छादित कर दिया।
O King! He showered arrows as bright as fire, precious maces and various kinds of weapons and covered Dronacharya alone. 37.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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