श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.122.36 
संनिरुद्धं रणे द्रोणं पञ्चाला वीक्ष्य मारिष।
आवव्रु: सर्वतो राजन् धर्मपुत्रजयैषिण:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! द्रोणाचार्य को युद्धस्थल में अवरुद्ध देखकर धर्मपुत्र की विजय चाहने वाले पांचालों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया॥36॥
 
Honorable King! Seeing Dronacharya blocked in the battlefield, the Panchalas, who wanted the victory of Dharmaputra, surrounded him from all sides. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)