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mahabharat 7.122.32: महाराज! उस समय आचार्य द्रोण युद्धस्थल में बार-बार अपना नाम जपकर पाण्डव, पांचाल और मत्स्य सैनिकों का संहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.122.32 
ततो द्रोणो महाराज नाम विश्राव्य संयुगे।
पाण्डुपाञ्चालमत्स्यानां प्रचक्रे कदनं महत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय आचार्य द्रोण युद्धस्थल में बार-बार अपना नाम जपकर पाण्डव, पांचाल और मत्स्य सैनिकों का संहार करने लगे।
 
Maharaj! At that time Acharya Drona started killing the Pandava, Panchala and Matsya soldiers by chanting his name repeatedly on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)